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Rainbow अर्थात इंद्रधनुष कैसे बनता है?
दोस्तों, इंद्रधनुष वह रंगीन आकाशीय चिह्न है जो हमें बारिश के बाद दिखाई देता है। यह सूर्य की रोशनी के पानी की बूंदों से टकराने और विभिन्न रंगों में बंटने की प्रक्रिया से उत्पन्न होता है। आइए, हम इसे आसान शब्दों में समझते हैं।
1. प्रकाश का विकिरण (Refraction):
जब सूर्य की रोशनी पानी की एक छोटी सी बूँद से टकराती है, तो यह रोशनी अंदर की तरफ मुड़ जाती है। इसे विकिरण कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि जैसे ही प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में प्रवेश करता है (जैसे हवा से पानी में), उसकी गति और दिशा बदल जाती है।
2. परावर्तन (Reflection):
इसके बाद, रोशनी पानी की बूँद में परावर्तित होती है यानी अंदर से टकराकर वापस आ जाती है। यह परावर्तन से होता है।
3. प्रकीर्णन (Dispersion):
जब रोशनी पानी की बूँद से बाहर निकलती है, तो उसका अलग-अलग रंग बिखरने लगता है। सूरज की सफेद रोशनी में सात रंग होते हैं – लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इंडिगो, और बैंगनी। ये रंग बूँद के अंदर से बाहर निकलते वक्त अलग-अलग कोणों पर मुड़ते हैं, जिससे हमें ये रंग दिखाई देते हैं। इसे ही प्रकीर्णन कहते हैं।
दोस्तों, इंद्रधनुष का रूप (form of Rainbow) इन सभी रंगों के बिखरने और फैलने की प्रक्रिया से हमें एक सुंदर इंद्रधनुष दिखाई देता है। यह हमेशा हमें हल्की बारिश या बूंदों के बाद दिखाई देता है, जब सूरज की रोशनी इन बूंदों से टकराती है।
यह सारी प्रक्रिया मिलकर इंद्रधनुष के रंगीन रूप को उत्पन्न करती है।कैसी लगी जानकारी? दोस्तों, आशा है, आपको अब इंद्रधनुष बनने की प्रक्रिया समझ में आ गई होगी, ऐसी रोचक जानकारी के लिए comment करें और अपने राय साँझा करें!








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